Monday, April 23, 2007

लैंस डाउन - कुछ और भी है कहना दिखाना

ऐसे साफ आसमान को शायद हम दिल्ली मे नही देख सकते। ऐसे ही नज़ारों को मन भर समेट लेने के लिए हम बार बार दौड जाते हैं पहाडों की ओर।
बादल -सूरज का यह प्रिय खेल है । अपनी ऑखों से हर नज़ारा ,काश दिखा पाते। और गढवाल छावनी मे हमारा प्रवेश।साफ और सुन्दर सडकें।
"
एक गोली एक दुश्मन "
यह कहना है गढवाल राईफल्स का ।जोशीला चित्र देख ते ही छावनी का चरित्र सामने आ जाता हैं ।झाडू लगाता एक सिपाही नज़र आता है, चमकती सडके इन्ही की बदौलत हैं ।


सूर्योदय का दृश्य छन कर दिखता हुआ पेडों से।

to be continued....

2 comments:

Amit said...

खूब, तो आप भी घूम आए। :) हमने नव-वर्ष 2007 का स्वागत वहीं किया था, यात्रा-संस्मरण भी लिखा था। :)

Udan Tashtari said...

अच्छे चित्र. बहुत सुंदर.